जॉन इल्या शायरी
- Get link
- X
- Other Apps
उर्दू अदब के मक़बूल नामों में से एक हैं हजरत जौन एलिया, जिन्होंने शायरी की लीक को एक नया मोड़ दिया इसलिए वे सीधे दिल में उतरे और उनके शेर महबूबों के राग बन गए। पेश हैं जौन एलिया के लिखे बेहतरीन शेर
अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
अब तो हर बात याद रहती है
ग़ालिबन मैं किसी को भूल गयाविज्ञापन अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या
इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंनेउस गली ने ये सुन के सब्र किया
उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
एक ही तो हवस रही है हमें
अपनी हालत तबाह की जाएक्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं
कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं कियाकाम की बात मैंने की ही नहीं
काम की बात मैंने की ही नहीं
ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं
कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगेकितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे
कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मेरी जान तेरे बस का नहींख़र्च चलेगा अब मेरा
ख़र्च चलेगा अब मेरा किस के हिसाब में भला
सब के लिए बहुत हूँ मैं अपने लिए ज़रा नहीं
जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगेज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत मेंजो गुज़ारी न जा सकी हम से
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
'जौन' दुनिया की चाकरी कर के
तूने दिल की वो नौकरी क्या कीनया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम
विशेष
आज के शीर्ष कविShow all
Recommended
मैं घोर आशावादी हूँ
निराशा को कभी
पास नहीं फटकने देता
मेरी उम्मीदों की ढाल से
टकराकर लौट जाती हैं
गर कभी मायूसियां
मेरी ओर आती है
आरजू की गहरी वादियों में
सौंधी पवन सरसराती है
बारिश के पा...और पढ़ें
कुछ वक़्त बदल रहा था,
कुछ हवाएं बदल रही थी,
मै चुप खड़ा था अब भी उसके इंतजार मे,
पर अब वो अदायें बदल रही थी ।
उनकी ख़ामोशी बढ़ रही थी,
उनके अल्फाज लडखड़ा रहे थे,
शायद नही रहा किस्मत मे मिलना मुनासिफ
क्...और पढ़ें
कृष्ण की बांसुरी की धुन,
संसार में अपनी धुन पा गई,
राधा के साथ-साथ,
अनेकों गोपियों को,
अपना दीवाना बना गई।।
सीमा सूद और पढ़ें
- Get link
- X
- Other Apps













